देवउठनी एकादशी पर हुआ तुलसी विवाह, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

मुंगेली । लोक आस्था के अनुसार, देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर आज पूरे जिले में तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। यह पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु को जागृत होने के रूप में पूजा जाता है, इसलिए इसे देवउठनी या प्रतिपदा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन से देवताओं का शयनकाल समाप्त होता है और वे फिर से पृथ्वी पर कार्य और दर्शन करने आते हैं। आज तुलसी विवाह के अवसर पर मंदिरों और घरों में तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु या कृष्ण से बड़े धूमधाम से संपन्न किया गया। इस अवसर पर पूजा अर्चना, मंत्रोच्चारण और विशेष विधियों का पालन किया गया। लोक परंपरा के अनुसार तुलसी विवाह से परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। विशेषज्ञों और पंडितों के अनुसार, तुलसी को धर्म और स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तुलसी विवाह का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मेलजोल बढ़ाने वाला भी माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक रीतियों के अनुसार तुलसी विवाह संपन्न किया। यह पर्व आस्था, परंपरा और संस्कृति के सुंदर संगम का प्रतीक है।

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