रिपोर्टर विनय सिंह ब्यूरो बेमेतरा

कुसमी/बेमेतरा । बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक अंतर्गत कुसमी सेवा सहकारी समिति में गुरुवार को धान खरीदी केंद्र का माहौल तब अचानक गरमा गया, जब किसानों ने अवैध वसूली के आरोपों को लेकर समिति प्रबंधक को मौके पर ही चारों तरफ से घेर लिया। कई दिनों से “धान में नमी ज़्यादा है”, “मिट्टी है”, “बदरा है”, “पैसा दो तभी वजन-एंट्री होगी”—जैसी बातें सुन-सुनकर किसानों का सब्र टूट गया था।
**10–15 हजार रुपए की डिमांड का आरोप, किसानों ने बताया—
“नमी बहाना, पैसा असली मकसद”**
किसानों का आरोप है कि समिति प्रबंधक द्वारा 10 से 15 हजार रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही थी। पैसा न देने पर धान की एंट्री रोकने और खरीदी प्रक्रिया आगे न बढ़ाने की धमकी दी जाती थी।
गुस्से में भरे किसान बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे—
“हम धान बेचने आते हैं, अत्याचार सहने नहीं। हर साल नमी का बहाना बनाकर जेब खाली नहीं करवाएंगे।”
अफसरों की मौजूदगी में खुली पोल — प्रबंधक का ‘आदमी’ मीडिया के सामने कबूला
जैसे ही मामला तूल पकड़ने लगा, बेरला तहसीलदार, उप पंजीयक सहकारिता, और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी राजेंद्र बारे तत्काल कुसमी पहुंचे। किसानों से लिखित और मौखिक कथन लिए गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि समिति प्रबंधक द्वारा नियुक्त व्यक्ति ने मीडिया के सामने ही वसूली की बात स्वीकार कर ली, और बताया कि कुछ किसानों से 10 तो कुछ से 15 हजार रुपए तक लिए गए थे।
प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से हटाया गया
मामला गंभीर होते देख SDM को भेजी गई रिपोर्ट में तत्काल कार्रवाई की अनुशंसा की गई और समिति प्रबंधक सोमेश साहू को पद से तुरंत हटा दिया गया।
किसानों की मांग: पूरी समिति की जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई
मौके पर तनाव पूरे दिन बना रहा। किसानों ने कहा कि यह मामला सिर्फ कुसमी का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों की मेहनत और उम्मीदों से जुड़ा है।
अब जिले में बड़ा सवाल यह है—
क्या सिर्फ प्रबंधक हटाने से बात खत्म हो जाएगी या इस पूरे वसूली तंत्र पर कड़ी कार्रवाई होगी?

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