
यूपी में शॉर्ट एनकाउंटर के बाद 4 आरोपी गिरफ्तार, बीट सिस्टम–हाईटेक पुलिसिंग से मिली बड़ी सफलता
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सरकंडा थाना क्षेत्र के राजकिशोर नगर में सराफा कारोबारी संतोष तिवारी से हुई 3.35 करोड़ रुपए की सनसनीखेज लूट के मामले में पुलिस ने तेज, तकनीक-सक्षम और समन्वित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को धर दबोचा। फरार बदमाशों का पीछा करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस उत्तर प्रदेश तक पहुंची, जहां में हुई संयुक्त कार्रवाई के दौरान शॉर्ट एनकाउंटर हुआ। मुठभेड़ में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि तीन अन्य ने आत्मसमर्पण कर दिया।

वारदात के बाद ‘Get-Set-Go’ मोड में पुलिस
लूट की सूचना मिलते ही पुलिस महकमा ‘get-set-go’ रणनीति के तहत सक्रिय हो गया। तत्काल 10 विशेष टीमों का गठन कर अलग-अलग एंगल से जांच शुरू की गई। बीट स्तर पर तैनात जवानों को अलर्ट कर जमीनी सूचनाएं जुटाई गईं, जिससे शुरुआती सुराग हाथ लगे।
ग्राम उरतुम के पास लूटी गई कार की बरामदगी के बाद जांच ने रफ्तार पकड़ी। शहर और आउटर इलाकों के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। टॉवर डंप डाटा का विश्लेषण, संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान और फिंगरप्रिंट का नेफिस सर्वर से मिलान जैसे हाईटेक कदम उठाए गए।
चोरी के वाहनों से रची गई थी पूरी साजिश
जांच में सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और कार दोनों चोरी की थीं। बाइक अंबिकापुर में पदस्थ नगर सैनिक राकेश चौबे के नाम दर्ज थी, जिसे 13 फरवरी को मैनपाट से चुराया गया था। वहीं सफेद इको वैन घटना से एक दिन पहले अकलतरा थाना क्षेत्र से चोरी की गई थी।
सीसीटीवी विश्लेषण में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी पहले स्कॉर्पियो से सराफा कारोबारी का पीछा कर रहे थे और फिर उसी वाहन से फरार हो गए।
एसएसपी रजनेश सिंह की सख्त मॉनिटरिंग
छुट्टी पर रहने के बावजूद पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रहे। अधिकारियों से निरंतर संपर्क, स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण और बेहतर टीम समन्वय के कारण कार्रवाई प्रभावी रही। आईजी स्तर पर सुपरविजन रहा, लेकिन जिला स्तर पर रणनीतिक नेतृत्व और फील्ड एक्शन एसएसपी के मार्गदर्शन में संचालित हुआ। इससे पहले भी उनकी त्वरित निर्णय क्षमता और सख्त मॉनिटरिंग शैली कई मामलों में परिणाम दे चुकी है।
अंतरराज्यीय कार्रवाई, मुठभेड़ में एक घायल
तकनीकी इनपुट साझा कर उत्तर प्रदेश पुलिस से सहयोग लिया गया। मिर्जापुर में संदिग्ध वाहन का पीछा करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की। इसमें एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि अन्य ने सरेंडर कर दिया।
बीट सिस्टम और हाईटेक पुलिसिंग का दिखा असर
पूरे मामले में पुलिस का मजबूत बीट सिस्टम और हाईटेक पुलिसिंग मॉडल कारगर साबित हुआ। स्थानीय इंटेलिजेंस, डिजिटल सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के संयोजन ने जांच को निर्णायक दिशा दी। बड़ी वारदात के बाद जिस तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई गई, उसने पुलिस की तैयारियों और रणनीति की पुष्टि की।
अब आगे क्या?
मिर्जापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाया जाएगा। लूटे गए सोने और नकदी की बरामदगी को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
3.35 करोड़ की इस बड़ी लूट के बाद त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने यह साफ संदेश दिया है कि बिलासपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस तंत्र सतर्क, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख है।

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