सफलता कि कहानी : बैंकिंग से खेती तक: जल संकट में फसल विविधीकरण की मिसाल बने विवेक धर दीवान

रिपोर्टर विनय सिंह ब्यूरो बेमेतरा*बेमेतरा लगभग बीस वर्षों तक बैंकिंग क्षेत्र में सेवाएँ देने के बाद, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर कार्य कर चुके विवेक धर दीवान ने एक साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय लिया। रायपुर में उपाध्यक्ष (वाईस प्रेसिडेंट) जैसे वरिष्ठ पद पर रहते हुए उन्होंने पिछले वर्ष नवंबर में नौकरी छोड़ दी और अपने पैतृक गाँव ताला (ब्लॉक बेमेतरा) लौटकर कृषि को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। गाँव लौटने पर उन्होंने महसूस किया कि क्षेत्र में खरीफ और रबी—दोनों मौसमों में धान की खेती की जा रही है, जबकि धान उच्च जल आवश्यकता वाली फसल है और रबी मौसम के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। लगातार जल संकट और राज्य में न्यूनतम वर्षा को देखते हुए विवेक धर दीवान ने न केवल स्वयं बदलाव का निर्णय लिया, बल्कि पंचायत के तीनों गाँवों को नॉन-धान क्षेत्र (नॉन पेड्डी जोन ) घोषित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इसके तहत रबी मौसम में दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी गई—जिनमें गेहूँ, चना, रागी, सूरजमुखी, मूंग आदि शामिल हैं। स्वयं एक जिम्मेदार किसान और नेतृत्वकर्ता के रूप में विवेक धर दीवान ने अपनी खेती की जमीन में गेहूँ, सरसों, रागी और सूरजमुखी की बुवाई की। खेती में आधुनिक जीरो सीड ड्रिल तकनीक अपनाई गई तथा फसल अवशेष प्रबंधन का सख्ती से पालन किया गया, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक खाद का लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि जब जिले में एक वर्ष से अधिक समय से जल संकट की स्थिति बनी हुई है, तब ऐसी रबी फसलों को बढ़ावा देना आवश्यक है जिनके पूरे फसल चक्र में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्णायक भूमिका निभाता है। वर्तमान में सरकार गेहूँ ₹2500 प्रति क्विंटल से अधिक, रागी ₹7000 प्रति क्विंटल से अधिक तथा सरसों ₹6200 प्रति क्विंटल की आकर्षक दर पर खरीद करती है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
विवेक धर दीवान की यह पहल न केवल जल संरक्षण और टिकाऊ खेती का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह सिद्ध करती है कि सही सोच, तकनीक और नेतृत्व से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनकी यह सफलता की कहानी आज बेमेतरा जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

बेमेतरा । बेमेतरा लगभग बीस वर्षों तक बैंकिंग क्षेत्र में सेवाएँ देने के बाद, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर कार्य कर चुके विवेक धर दीवान ने एक साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय लिया। रायपुर में उपाध्यक्ष (वाईस प्रेसिडेंट) जैसे वरिष्ठ पद पर रहते हुए उन्होंने पिछले वर्ष नवंबर में नौकरी छोड़ दी और अपने पैतृक गाँव ताला (ब्लॉक बेमेतरा) लौटकर कृषि को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। गाँव लौटने पर उन्होंने महसूस किया कि क्षेत्र में खरीफ और रबी—दोनों मौसमों में धान की खेती की जा रही है, जबकि धान उच्च जल आवश्यकता वाली फसल है और रबी मौसम के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। लगातार जल संकट और राज्य में न्यूनतम वर्षा को देखते हुए विवेक धर दीवान ने न केवल स्वयं बदलाव का निर्णय लिया, बल्कि पंचायत के तीनों गाँवों को नॉन-धान क्षेत्र (नॉन पेड्डी जोन ) घोषित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इसके तहत रबी मौसम में दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी गई—जिनमें गेहूँ, चना, रागी, सूरजमुखी, मूंग आदि शामिल हैं। स्वयं एक जिम्मेदार किसान और नेतृत्वकर्ता के रूप में विवेक धर दीवान ने अपनी खेती की जमीन में गेहूँ, सरसों, रागी और सूरजमुखी की बुवाई की। खेती में आधुनिक जीरो सीड ड्रिल तकनीक अपनाई गई तथा फसल अवशेष प्रबंधन का सख्ती से पालन किया गया, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक खाद का लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि जब जिले में एक वर्ष से अधिक समय से जल संकट की स्थिति बनी हुई है, तब ऐसी रबी फसलों को बढ़ावा देना आवश्यक है जिनके पूरे फसल चक्र में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्णायक भूमिका निभाता है। वर्तमान में सरकार गेहूँ ₹2500 प्रति क्विंटल से अधिक, रागी ₹7000 प्रति क्विंटल से अधिक तथा सरसों ₹6200 प्रति क्विंटल की आकर्षक दर पर खरीद करती है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।


विवेक धर दीवान की यह पहल न केवल जल संरक्षण और टिकाऊ खेती का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह सिद्ध करती है कि सही सोच, तकनीक और नेतृत्व से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनकी यह सफलता की कहानी आज बेमेतरा जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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