रिपोर्टर ✒️ विनय सिंह
बेमेतरा । बेमेतरा जिले में 15 नवंबर से प्रारंभ हुई धान खरीदी इस वर्ष भी परिवहन व्यवस्था की लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले के तीन दर्जन से अधिक धान खरीदी केंद्र बफर लिमिट पार कर चुके हैं, लेकिन परिवहन व्यवस्था अब तक सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई है, जिससे खरीदी और तौल की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ रहा है। विभागीय उदासीनता के चलते न सिर्फ समिति प्रबंधनों की मुश्किलें बढ़ी हैं, बल्कि आने वाले दिनों में किसानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
🔥 खतरनाक स्तर पर पहुंचा बफर स्टॉक
जिले के 129 धान खरीदी केंद्रों में किसानों की धान की आवक लगातार तेज बनी हुई है। समिति प्रबंधन द्वारा धान की आवक को देखते हुए लगातार स्टेक तैयार किए जा रहे हैं, बावजूद इसके परिवहन के घोर अभाव में केंद्रों में बफर स्टॉक खतरनाक स्तर तक पहुंचता जा रहा है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी राजेंद्र वारे ने स्पष्ट किया है कि बफर लिमिट पार कर चुके केंद्रों की जानकारी जिला विपणन अधिकारी (DMO) को समय रहते उपलब्ध करा दी गई है। इसके बावजूद, न तो जिला प्रशासन और न ही विपणन विभाग ने परिवहन शुरू करने को लेकर अब तक कोई ठोस कार्ययोजना बनाई है। इस तरह की लापरवाही और उदासीनता पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
⚠️ गहरा सकता है संकट: बारदाना और फड़ प्रबंधन
यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में धान रखने की जगह ही नहीं बचेगी और खरीदी केंद्र पूरी तरह जाम हो जाएंगे। विगत वर्ष की तरह इस बार भी समय पर परिवहन नहीं होने से भविष्य में बारदाना संकट, फड़ प्रबंधन और स्टेकिंग की समस्या गहराने की आशंका है। जिस रफ्तार से बफर स्टॉक बढ़ रहा है, उससे खरीदी व्यवस्था का चरमराना तय माना जा रहा है।

नोडल अधिकारी राजेंद्र वारे ने कहा, “हमने समय पर बफर लिमिट पार कर चुके केंद्रों की जानकारी विपणन विभाग को दे दी है, अब परिवहन शुरू करना उनकी जिम्मेदारी है।”
🚧 डीओ कटान में देरी, कई केंद्र ओवरलोड
जिले की कई ब्रांचों में परिवहन व्यवस्था का बुरा हाल है। मारो ब्रांच के अंतर्गत बुंदेला, मारो, चक्रवाय और गुंजेरा सहित सभी उपार्जन केंद्रों में अब तक डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) नहीं कट पाया है, जिससे खरीदी ठप्प होने की स्थिति में आ सकती है। वहीं, प्रतापपुर ब्रांच के रनबोड, छिरहा एवं प्रतापपुर समिति केंद्र पहले ही बफर लिमिट से अधिक भर चुके हैं और खरीदी जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
💡 प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न
यदि शीघ्र परिवहन व्यवस्था शुरू नहीं की गई तो किसानों को खरीदी केंद्रों में धान बेचने और तौल कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ेगा। इसके अलावा, खुले में रखे धान के सुरक्षित भंडारण को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि बेमौसम बरसात या मौसम खराब होने की स्थिति में धान भीगने का खतरा रहेगा। यह पूरी स्थिति जिला प्रशासन और विपणन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
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