रिपोर्टर ✒️ सूचित कुमार मरावी

• डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय में लोक में राम विषय पर कई राज्यों के लोक कलाकारों ने दी प्रस्तुति

करगीकला । डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में हर चार दिवसीय रमन लोक कला महोत्सव का आगाज हो गया ।पहले दिन आज कई राज्यों से आए लोक कलाकारों ने भगवान राम पर केंद्रित प्रस्तुतियां दी और उनके जीवन को लोक कला से सबके सामने रखा। चार दिनों तक लोक में राम विषय पर देश के कई राज्यों के कलाकार यहां अपनी प्रस्तुति देंगे । 13 से 16 फरवरी तक चार दिवसीय रमन लोक कला महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस बार महोत्सव की थीम “लोक में राम” रखी गई है। आयोजन में छत्तीसगढ़ के साथ उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, झारखंड, असम सहित अनेक राज्यों के लोक कलाकार भाग लेकर भगवान राम से जुड़ी विविध लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर वर्णिका शर्मा ने राम के महत्व को बताते हुए कहा कि राम भाषण का विषय नहीं धारण का विषय है। उन्होंने कहा कि हमें राम की तपस्या को अपने आचरण में स्वीकार करना चाहिए।। उन्होंने बताया कि जब किसी प्रिय वस्तु के चले जाने पर क्लेश होता है तो वहां महाभारत हो जाती है ,और जब हम छोड़ने और त्याग करने का काम करते हैं। तो वहां रामायण हो जाती है। उन्होंने भगवान राम के जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं को सभी से साझा किया। उन्होंने बताया कि राम हमारे जीवन में हमारे मन में और हमारे हृदय में विद्यमान हैं । बस हमें उन्हें अपने आचरण में उतरने की आवश्यकता है। इस अवसर पर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बेलतरा विधानसभा के विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि राम से हमें तपस्या, कुशल संगठक ,संतुलित जीवन, कठिन परिश्रम ,में धैर्य और जन भावनाओं का सम्मान करना सीखना चाहिए ।।उन्होंने कहा कि जब राम को हम उल्टा पढ़ते हैं। तो ।मरा हो जाता है। हमें अपने जीवन से अहंकार और लालच और बुराइयों का को मारना होगा। तभी हम भगवान राम के के जैसे बन सकेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर सी वी रमन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ,वरिष्ठ साहित्यकार श्री संतोष चौबे ने कहा कि तुलसीदास जी को या लग गया था ,कि भगवान राम को लोक भाषा में ही ज्यादा समझ जा सकेगा। इसलिए उन्होंने लोक भाषा में रामचरितमानस की रचना की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में 300 से अधिक रामायण लिखी गई है। हम राम के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकते। यही भारत की जीवन शक्ति है, उन्होंने इंडोनेशिया ,थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, सहित अनेक देशों में भगवान के पूजे जाने की परंपरा को सभी से साझा किया ।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक कला का गढ़ है। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की की धरोहर प्रोजेक्ट डॉक्टर सीवी रमन विश्वविद्यालय द्वारा चलाया जाएगा ।।जिसमें कि छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति साहित्य लोकनाट्य सहित समस्त छत्तीसगढ़ की जीवन शैली को संरक्षित एवं संरक्षण किया जाएगा।। इसके साथ-साथ विश्वविद्यालय में सेंट्रल सेंटर फॉर ट्राईबल रिसर्च की स्थापना भी की जाएगी। कार्यक्रम में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने कहा कि डॉ सी वी रमन विश्वविद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं जीवन संस्कृति सभ्यता लोक कला लोक व्यवहार की जानकारी भी देता है।। यही कारण है कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो रहा है, और यहां के विद्यार्थी भारत ही नहीं विदेशों में भी विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं । इस अवसर पर उपस्थित विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि डॉ सी वी रमन विश्वविद्यालय लोक ज्ञान को वैश्वीकरण करने के कार्य में जुटा हुआ है । इसलिए नित्य नए नवाचार हम विश्वविद्यालय में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह माटी संस्कारों की माटी है और हम इस संस्कारों की माटी को भाभी युवा पीढ़ी तक मूल रूप में पहुंच जाएंगे ताकि हमारा भविष्य का भारत संस्कारवान बने। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की समकुलपति दो जयंती चटर्जी मित्र ने आभार प्रकट किया उन्होंने कहा कि भगवान राम देश के सबसे बड़े आदर्श हैं और इस आदर्श को हमें अपने जीवन में उतारने के लिए सबसे पहले लोक मैं राम को समझना होगा तभी हम उनके जीवन के चरित्र को समझ सकेंगे। भाभी युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण के लिए श्री राम का अनुकरण अनिवार्य है। कार्यक्रम का संचालन डॉ ज्योति वाला गुप्ता डॉ ब्रम्हेश श्रीवास्तव एवं श्वेता पांडे ने किया।

सरकारी स्लॉट में दी गई जानकारी
कार्यक्रम स्थल पर शासकीय और गैर शासकीय संस्थाएं स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों और योजनाओं की जानकारी दी गई। विद्यार्थी भी मॉडल और प्रस्तुति के माध्यम लोगों के सामने विश्वविद्यालय को दिखाया।
छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं लोकनाट्य पर हुआ मंथन
डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय मैं आयोजित रमन लोक कला महोत्सव लोक में राम के अवसर पर वैचारिक सत्र का आयोजन किया गया ।जिसमें छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं लोकनाट्य विषय पर प्रसिद्ध रंग कर्मी एवं नाटक निदेशक राकेश तिवारी वरिष्ठ लोक कलाकार मंत राम यादव, देवार गीत गायिका रेखा देवार ने छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं लोकनाट्य पर अपने विचार विस्तार से साझा किया.। इस अवसर पर उपस्थित डॉ सी वी रमन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं संस्कृति धर्मी संतोष चौबे ने कहा कि डॉक्टर सी वी रमन विश्वविद्यालय में जल्द ही धरोहर प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। जिसमें हम छत्तीसगढ़ के विभिन्न विधाओं को संरक्षित एवं संबोधित करने की दिशा में कार्य करेंगे लोक कलाकारों की कृतियां उनकी रचनाएं के समस्त विधाओं को लिपिबद्ध किया जाएगा ।साथी सभी विधाओं के डॉक्यूमेंटेशन तैयार किए जाएंगे यह कार्य पूरी छत्तीसगढ़ स्तर पर किया जाएगा उन्होंने यह भी बताया कि सेंटर फॉर ट्राईबल रिसर्च सेंटर भी डॉक्टर सीवी रमन विश्वविद्यालय में स्थापित होगा।
कर्मा, भरथरी और पंडवानी ने सबका मन मोहा
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । इसके बाद तमनार से आए के जनक साय एवं साथियों ने करमा नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। इसी तरह रामनारायण धुर्वे एवं साथी ने श्री राम जन्म पर आधारित मानस गान किया। राजधानी रायपुर से आए राकेश तिवारी एवं साथियों ने छत्तीसगढ़ी में नाटक की प्रस्तुति दी। जो भगवान राम पर केंद्रित था। चेतन लाल देवांगन एवं साथियों ने पंडवानी शैली में रामायण प्रसंग का उल्लेख किया। जिसे सभी ने सराहा। कार्यक्रम के अंत में शकुंतला भारद्वाज एवं मन्नू राजा ने भरथरी की प्रस्तुति दी।

The News Related To The News Engaged In The “The R Bharat” Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
