मानिकपुर खदान में ठेका श्रमिकों का शोषण, बंधुआ मजदूरी जैसे हालात का आरोपनकद भुगतान, कम वेतन, 12 घंटे काम और सुरक्षा में लापरवाही से श्रमिक आक्रोशित

रिपोर्टर ✒️ जावेद अली

कोरबा । कोरबा जिले की एसईसीएल की मानिकपुर कोयला खदान एक बार फिर विवादों में है। यहां कार्यरत निजी आउटसोर्सिंग कंपनी एससीसी पर ठेका श्रमिकों से बंधुआ मजदूरी जैसे हालात में काम कराने, श्रम कानूनों के उल्लंघन और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर श्रमिकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

नकद में मजदूरी, एचपीसी दरों की अनदेखी

श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी द्वारा मजदूरी का भुगतान बैंक खातों में न कर नकद दिया जा रहा है। वह भी मात्र 10 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह, जबकि कोल इंडिया की हाई पावर कमेटी (HPC) द्वारा कुशल श्रमिक के लिए 1,351 रुपए प्रतिदिन की दर निर्धारित है। इससे श्रमिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फर्जी आरोप लगाकर काम से निकाले गए मजदूर

दिनांक 20 दिसंबर 2025 को कंपनी के अधिकारी सतेंद्र साहू द्वारा पांच श्रमिकों पर डीजल चोरी का आरोप लगाकर उन्हें बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के काम से निकाल दिया गया। श्रमिकों का कहना है कि आरोप पूरी तरह फर्जी हैं और निकाले गए मजदूरों का वेतन भी रोक दिया गया है।

12 घंटे तक काम, साप्ताहिक अवकाश नहीं

श्रमिकों के अनुसार उनसे प्रतिदिन 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जबकि श्रम कानूनों में अधिकतम 8 घंटे कार्य का प्रावधान है। इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जा रहा, जिससे श्रमिकों का शारीरिक और मानसिक शोषण हो रहा है।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव, हादसों का खतरा

खदान क्षेत्र में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी बताई जा रही है। पूर्व में दुर्घटनाएं होने के बावजूद सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। आरोप है कि दुर्घटना की स्थिति में एसईसीएल द्वारा देय 25 लाख रुपए तक की अनुग्रह राशि और बीमा लाभ को दबाने के प्रयास किए जाते हैं।

ईपीएफ-सीएमपीएफ से वंचित श्रमिक

ठेका श्रमिकों का कहना है कि कंपनी द्वारा ईपीएफ, सीएमपीएफ और पेंशन योजना का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। यह स्थिति केवल मानिकपुर तक सीमित नहीं, बल्कि एसईसीएल के अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है।

गाली-गलौज और धमकियों का आरोप

श्रमिकों ने कंपनी अधिकारियों सतेंद्र साहू और राज अग्रवाल पर अभद्र भाषा, गाली-गलौज और धमकियां देने के आरोप लगाए हैं। बताया गया कि मनमाने तरीके से वेतन कम स्वीकार न करने पर करीब 70 ठेका मजदूरों को नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। नकद भुगतान का एक वीडियो भी श्रमिकों द्वारा साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

श्रमिकों ने कलेक्टर से मांग की है कि—

  • निकाले गए सभी श्रमिकों को तत्काल बहाल किया जाए,
  • एचपीसी दरों के अनुसार पूरा वेतन बैंक खाते में दिया जाए,
  • कार्य समय 8 घंटे तय कर साप्ताहिक अवकाश दिया जाए,
  • सभी श्रमिकों का ईपीएफ/सीएमपीएफ पंजीकरण कराया जाए,
  • दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई हो,
  • तथा खदान में कार्यरत सभी श्रमिकों की बायोमेट्रिक हाजिरी को एसईसीएल की मुख्य प्रणाली से जोड़ा जाए।

गंभीर दुर्घटना की आशंका

श्रमिकों का कहना है कि मौजूदा हालात बने रहने पर किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर एसईसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि श्रमिकों को उनका हक और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके।

वायरल वीडियो की पुष्टि The R Bharat News नाई करता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!